प्लास्टरिंग कार्य (Plastering Work)

       प्लास्टरिंग निर्माण उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका इतिहास प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है। इसका उपयोग दीवारों, छतों और अन्य सतहों पर एक चिकनी, मजबूत और आकर्षक परत लगाने के लिए किया जाता है। यह न केवल आंतरिक और बाहरी सतहों को सजाता है, बल्कि संरचनाओं को मौसम और अन्य बाहरी प्रभावों से भी बचाता है। प्लास्टरिंग का कार्य न केवल एक कारीगरी है, बल्कि इसे कार्यक्षमता, सामग्री विज्ञान और सही तकनीकी ज्ञान का मिश्रण माना जा सकता है।

 

प्लास्टरिंग के माध्यम से हम किसी भी निर्माण कार्य की स्थिरता, सुंदरता और टिकाऊपन में वृद्धि कर सकते हैं। यह दीवारों, छतों और अन्य संरचनाओं के लिए एक मजबूत और सुरक्षित परत प्रदान करता है, जो न केवल सुरक्षा प्रदान करता है बल्कि सजावट और संरचनात्मक मजबूती भी बढ़ाता है। इस लेख में हम प्लास्टरिंग के प्रकार, प्रक्रिया, सामग्री, उपकरण, और इसके निर्माण कार्य में योगदान को विस्तार से समझेंगे।

 

  1. प्लास्टरिंग का उद्देश्य और महत्व

 

प्लास्टरिंग कार्य का प्रमुख उद्देश्य दीवारों और छतों की सतह को चिकना, समान और आकर्षक बनाना है, ताकि इसे विभिन्न सजावटी और उपयोगी प्रयोजनों के लिए तैयार किया जा सके। इसके अलावा, प्लास्टरिंग निम्नलिखित कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है:

 

1.1 सतह की समतलता और सजावट

प्लास्टरिंग का मुख्य उद्देश्य दीवारों और छतों की सतह को चिकना और स्तरित बनाना है। इसे बनाने के बाद, सतह को पेंट, वॉलपेपर, टाइल्स आदि से सजाया जा सकता है। एक अच्छी तरह से प्लास्टर की गई सतह न केवल आकर्षक दिखती है, बल्कि यह अतिरिक्त सजावट के लिए भी एक आदर्श मंच प्रदान करती है।

 

1.2 सुरक्षा और स्थायित्व

प्लास्टरिंग से दीवारों और छतों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। यह बाहरी प्रभावों जैसे कि बारिश, धूप, हवा, और नमी से बचाता है। विशेष रूप से बाहरी दीवारों पर यह मौसम से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन बनता है। जब दीवारों पर प्लास्टर किया जाता है, तो यह संरचना को मलबे, धूल और नमी से भी बचाता है, जिससे दीवारों और छतों की उम्र बढ़ती है।

 

1.3 ऊष्मा और ध्वनि इन्सुलेशन

कुछ प्रकार के प्लास्टरिंग में अच्छे इन्सुलेशन गुण होते हैं, जो घर या इमारत के अंदर तापमान को स्थिर रखते हैं और ध्वनि के प्रभाव को कम करते हैं। उदाहरण के लिए, चूने का प्लास्टर और सीमेंट आधारित प्लास्टर ऊष्मा और ध्वनि इन्सुलेशन प्रदान करते हैं, जिससे घर के अंदर का वातावरण अधिक आरामदायक बनता है।

 

1.4 आग प्रतिरोध

प्लास्टरिंग कुछ हद तक आग प्रतिरोधक भी होती है। उदाहरण के लिए, जिप्सम प्लास्टर आग में रक्षात्मक होता है, जिससे आग के फैलने की गति धीमी होती है और इमारत के अंदर के लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर निकलने का समय मिल सकता है। यह एक सुरक्षा उपाय के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से वाणिज्यिक भवनों और बड़ी इमारतों में।

 

1.5 सौंदर्य वृद्धि

प्लास्टरिंग केवल कार्यात्मक नहीं होती, बल्कि यह संरचना की सौंदर्यात्मक अपील को भी बढ़ाती है। प्लास्टर का उपयोग सजावटी डिजाइन बनाने के लिए भी किया जा सकता है, जैसे कि कॉर्निस, मोल्डिंग, छत की सुंदरता, और अन्य आर्किटेक्चरल तत्व जो इमारत के समग्र रूप को आकर्षक बनाते हैं।

 

  1. प्लास्टरिंग के प्रकार

 

प्लास्टरिंग के कई प्रकार होते हैं, जो विभिन्न आवश्यकताओं, वातावरणों और उपयोगों के हिसाब से उपयोग किए जाते हैं। मुख्य प्रकार के प्लास्टरिंग में शामिल हैं:

 

2.1 आंतरिक प्लास्टरिंग

 

आंतरिक प्लास्टरिंग का उपयोग इमारतों की आंतरिक दीवारों, छतों और विभाजन पर किया जाता है। इसका उद्देश्य चिकनी और आकर्षक सतह तैयार करना है, जिस पर पेंट, वॉलपेपर या अन्य सजावटी सामग्रियां लगाई जा सकती हैं।

 

आंतरिक प्लास्टरिंग के प्रमुख प्रकार:

बेस कोट: यह एक मोटी और मोटी परत होती है जो सतह को समतल और मजबूत बनाने के लिए लगाई जाती है।

फिनिश कोट: यह अंतिम, पतली और चिकनी परत होती है जो दीवार को आकर्षक और तैयार करने के लिए लगाई जाती है।

 

आंतरिक प्लास्टर के सामान्य प्रकारों में जिप्सम प्लास्टर और सीमेंट प्लास्टर शामिल हैं।

 

2.2 बाहरी प्लास्टरिंग (रेंडरिंग)

 

बाहरी प्लास्टरिंग, जिसे रेंडरिंग भी कहा जाता है, इमारत की बाहरी दीवारों पर प्लास्टर लागू करने की प्रक्रिया है। बाहरी प्लास्टरिंग संरचना को मौसम और बाहरी प्रभावों से बचाती है। यह दीवारों पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है जो बारिश, सूरज की गर्मी, और ठंडी हवाओं से बचाती है।

 

बाहरी प्लास्टरिंग के विभिन्न प्रकार:

सीमेंट रेंडर: यह एक मजबूत और मौसम-प्रतिरोधी प्लास्टर है, जिसका उपयोग बाहरी दीवारों पर किया जाता है।

चूने का रेंडर: यह एक सांस लेने योग्य प्लास्टर है, जो पुराने निर्माणों पर उपयोग किया जाता है ताकि दीवारों को सांस लेने का मौका मिले और नमी का संचय न हो।

एक्रेलिक रेंडर: यह आधुनिक रेंडर है, जो लचीला और पानी प्रतिरोधी होता है।

टेक्सचर्ड रेंडर: यह प्लास्टर की विभिन्न तकनीकों के माध्यम से सजावटी बनावट देने के लिए किया जाता है।

 

2.3  चूना प्लास्टरिंग

 

चूना प्लास्टर एक पारंपरिक प्लास्टर है जो चूने, रेत और पानी के मिश्रण से तैयार किया जाता है। यह प्लास्टर पुरानी इमारतों में विशेष रूप से उपयोगी होता है, क्योंकि यह दीवारों को सांस लेने का अवसर देता है और नमी को बाहर निकलने में मदद करता है। यह पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण से भी अच्छा माना जाता है।

 

चूना प्लास्टर को सामान्यत: कई परतों में लगाया जाता है:

बेस कोट: यह पहली मोटी परत होती है।

फिनिश कोट: यह अंतिम चिकनी परत होती है।

पॉलिश कोट: एक अंतिम, पॉलिश परत जो दीवार को आकर्षक और उच्च गुणवत्ता वाले बनाती है।

 

2.4 जिप्सम प्लास्टरिंग

 

जिप्सम प्लास्टर एक प्राकृतिक खनिज से तैयार किया जाता है और यह आधुनिक निर्माण में बहुत लोकप्रिय है। जिप्सम प्लास्टर का उपयोग आंतरिक दीवारों और छतों पर किया जाता है। यह जल्दी से सूखता है और इसका इस्तेमाल बहुत आसान है। जिप्सम प्लास्टर में बहुत अच्छे आग प्रतिरोधक गुण होते हैं, और यह दीवारों को सुंदर और चिकना बनाता है।

 

जिप्सम प्लास्टर को आमतौर पर दो प्रकारों में लगाया जाता है:

बॉन्डिंग प्लास्टर: यह सतह पर लागू किया जाता है ताकि प्लास्टर को बेहतर तरीके से चिपकाया जा सके।

फिनिशिंग प्लास्टर: यह अंतिम परत होती है जो चिकनी और आकर्षक बनावट देने के लिए लगाई जाती है।

 

2.5 सीमेंट प्लास्टरिंग

 

सीमेंट प्लास्टर सीमेंट, रेत और पानी का मिश्रण होता है। यह बहुत मजबूत, टिकाऊ और मौसम-प्रतिरोधी होता है। सीमेंट प्लास्टर का उपयोग आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार की दीवारों के लिए किया जाता है। यह दीवारों को जलवायु से बचाता है और दीवारों की ताकत बढ़ाता है।

 

सीमेंट प्लास्टरिंग में निम्नलिखित परतों का उपयोग होता है:

बेस कोट: यह मोटी परत होती है जो दीवार की संरचना को मजबूत करती है।

फिनिश कोट: यह चिकनी और आकर्षक परत होती है जो अंतिम रूप प्रदान करती है।

 

2.6 सजावटी प्लास्टरिंग

 

सजावटी प्लास्टरिंग का उपयोग आंतरिक और बाहरी दोनों जगहों पर किया जाता है ताकि दीवारों और छतों पर सुंदर डिजाइन बनाए जा सकें। यह डिजाइन विभिन्न रूपों में हो सकती हैं, जैसे कि मोल्डिंग, कॉर्निस, आर्क और अन्य वास्तुकला तत्व।

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